Monday, January 26, 2009

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पश्चात इसकी सभी पर्चियों को एक साथ मिलाते हुये भैरव ने कहा बच्चा इधर आओं। बच्चे के समीप आते ही उन्होने कहा- इससे एक पर्ची उठाओ और बाबा को दे आओं।
भैरव के कथनानुसार बच्चे ने एक पर्ची टोकरी से उठाकर बाबा के पास जाकर बोला- बाबा जी यह लो पर्चा।
बाबा- लाओं बच्चा खुश रहो, बेटा किशन इधर औओं ओर इसको खोलकर देखो की किस भाग्यशाली के पक्ष में छोटी सी पूँजी गई है। किशन पर्ची बाबा के हाथ से लेकर खोलते ही चैकते हुये कहा-बाबा जी, इसमें तो श्याम उबहादुर पुत्र किशनलाल लिखा है।
बबा मुस्कुराते हुये कहा है- हूँ तो क्या गलत लिखा है।
बाबा के इस प्रकार से कहने पर सभी ठहाका मारकर हसने लगे और बाबा वसीहत नामा के कागजात श्याम को सौपते हुये कहा-पोते श्याम इस जायजाद की बड़ी लम्बी कहानी है-जैसे की तुम्हारी अपने पिता, पुरखो की जयायजाद की, इसे अपनी आत्मा से अधिक श्रेय देना ‘खुश रहो’।
श्याम-जी दादा जी आपका हुक्म सर आंखो पर।
बाबा-शाबास हमे तुमसे यही आस थी।
बाबा कितने भले और बस्ती के चहेता थे यह उनके प्रस्थान से ही झलकने लगा था। वह ज्यों भरी आंखो से अपनी चैखट को आखिरी नत नमः कर चले कि अनायास ही सबकी आंखे छलकने लगीं, मगर बाबा ने पुनः मुड़कर देखना मुनासिब न समझा अपने पथ पर अग्रसर ही रहें। बाबा नामदेव बस्ती का भ्रमण करते हुये और सभी को आदर सत्कार देते हुये और स्वीकारते हुये ज्यों ही राय साहब की कोठी के सामने से आते ठहाके सुने वह चैकन्ने होकर बड़े गौर से उनके अल्फाज सुनते सुनाते कोठी की तरफ बढ़ते हुये कहा कि ‘राय साहब राम राम’ दीनानाथ राम आवाक होते हुये उनकी तरफ देखते हुये कहा-राम राम भाई नामदेव सुना है कि......।

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