Monday, January 26, 2009

पेज १०

राम राम किशन आओ अब तो इस्वर की कृपा से तुम्हारी पांचो उंगली में आ चुकी हैं अब तुम्हे किस प्रकार की परेशानी है अगर हमारे किसी सहयोगी नौकर ने अगर मेहनत मजदूरी के आंकड़े तैयार करने की कमी की है और तुम्हे तुम्हारी मजदूरी का हक थोड़ा बहुत मिला हो तो भाई अब तो रहम करो क्योंकि अब तो ईश्वर की कृपा से तुम सम्पन्न व्यक्तियों की श्रेणी में आ चुके हो और सम्मपन्न व्यक्ति अपनी हैसियत को देखते हुये थोड़ी मोअी कमियो गल्तियों प्रति अफवाह नहीं किया करते मगर तुम ओर श्याम ने हमारे साथ हमेशा ही अचछा सहयोग किया। हम वैसे भी तुम्हाने परिवार से बहुत खुश हैं इतना सभ्य परिवार हमे इस बस्ती में दूसरा कोई प्रतीत ही नहीं होता, खैर जाओ और अपना हिसाब सहीं करवाकर खुशी से अपना हिसाब चुकता करवा लो मैने उसका निर्देश दे दिया है।
किशन राय साहब के व्यक्तित्व को सुनते हुये ज्यों ही मुड़कर चलने लगा राय ने कहा- अरे हाँ किशन!
किशन- जी साहब
राय- हमने इतना कुझ कहा लेकिन तुमने कुछ जवाब नहीं दियां
किशन- क्या कहूँ आपने जो कुछ कहा उसके प्रति हम क्या जवाब दे, ईश्वर की कृपा से आपका यह व्यक्तव्य हमारे लिये आर्शीवाद ही बने।
राय साहब- शाबास हमे तुमसे ऐसी ही उम्मीद थी।
ना हम इतके नहीं अब उतके
घिर चुके हैं बीच भंवर
खुदा ही अब खेर करे।
दीपक नीलम के चेहरे की सुर्ख लकीरो की परिभाषा समझाते हुये कहा-नीलम।
नीलम- कहिये।

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